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Thursday, February 7, 2019

जन जन की आस्था का केन्द्र मेवडा़ का अच्छीनाथ मंदिर हर सोमवार को लगता है मेला



पादुकला समीपवर्ती गांव मेवड़ा में  स्थित श्री 1008 श्री अच्छीनाथ जी महाराज की तपोभूमि  ग्राम मेवडा़ कि पावन धरा अनादि काल से शुरों और संतों  की खास रमण स्थली के रूप में विख्यात रही है  जहाँ कदम कदम पर उनके इतिहास व जनश्रुतियो आज भी हे मान्यता है कि यहां रोंगो से ग्रसित दुखी लोगों को असीम शांति व रोग से फायदा मिलता है ऐसा ही स्थान राष्ट्रीय राजमार्ग 89 पर स्थित पांदुकला कस्बे से उतर दिशा मैं 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित करीब 1600 वर्ष पूर्व बना मंदिर मेवडा़ गांव  मे विध्मान है जिसे नाथ संप्रदाय के योगी पुरुष राजा भरतहरि के चार शिष्यों में से एक मेवड़ा में  अच्छीनाथ महाराज के समाधि स्थल के रूप में जाना जाता है मंदिर में अच्छीनाथ जी की जीवित समाधि स्थल सहित कुल 25 समाधियां हैं इनमें से 15 जीवित समाधियां  है वर्तमान समय में महंत पीर योगी लक्ष्मण नाथ जी महाराज पूजा अर्चना कर महंत  का दायित्व निभाते है
महंत पीर योगी लक्ष्मण नाथ जी महाराज बताते हैं कि सोमवार को पूरे दिन मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है   पूरे राजस्थान से लोग दर्शन करने आते हैं और जो बाबा के परिक्रमा लगा कर मन्नत मांगते हैं अच्छी नाथ जी उनकी मनोकामना पूर्ण करते और सोमवार शाम को सभी गांव के लोग  दर्शन करने के लिए आते है  और ढोल नागारो साथ बाबा की आरती मे भाग लेते  है जो  मन्नत मांगते  हैं उनकी बाबा मनोकामना पूरी करता है





अच्छीनाथ जी का जीवन परिचय

1600 वर्ष पूर्व भरतहरि महाराज ने बडा आसन राताढुंडा थांवला मे 12 वर्ष तक तपस्या की इस दौरान उन्होने भसुति के पिण्ड से चार शिष्य बनाए जिनमें भूवरनाथ  खेचरनाथ अस्वीनाथ व अच्छीनाथ  इन्होने भी 12 वर्ष तक थांवला मे तपस्या के बाद मेवडा़ मे जीवित समाधि ली

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